उत्तराखण्ड में सैलाब : उत्तरकाशी में एक ही दिन में तीन जगह बादल फटे।
बादल फटने की परिघटना:- किसी स्थान विशेष पर कम समय में अतिवृष्टि (उच्च वर्षा) की परिघटना ‘बादल फटना‘ कहलाती है। यह तब होता है जब ज्यादा नमी वाले बादल एक जगह रूक जाते हैं और वहाँ मौजूद नमी आपस में मिल जाती है। इनके भार से बादल का घनत्व बढ़ जाता है और तेज़ बारिश शुरू हो जाती है। बादल फटने से उस इलाके में बाढ़ की स्थिति बन जाती है।
परिभाषा:-
अगर एक छोटे क्षेत्र में (10km * 10 Km ) में 10 सेन्टीमीटर बारिश अगर 1 घंटे में होती है या उसके अनुपात में जैसे 30 मिनट में 5 सेमी. बारिश, तब उसे बादल फटना कहा जाता है
मुख्य विशेषताएँ :-
उच्च तीव्रता वाली वर्षा,
बादल फटने की घटनाएँ सामान्यतः स्थानीय प्रकृति की
कम समय के लिए,
पूर्वानुमान लगाना कठिन।
भारत में बादल फटने की प्रमुख घटनाएँ:-
उत्तरकाशी (उत्तराखण्ड) –
हिमालयी क्षेत्र – अमरनाथ गुफा 2022, कश्मीर घाटी-2014, ऊखीमठ-