जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक, 2025
जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक, 2025
चर्चा में क्यों :
हाल ही में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक, 2025 लोकसभा में पेश किया गया। यह पहल सरकार के सुशासन (Minimum government, Maximum governance) जैसे संकल्प को दर्शाती है।
पृष्ठभूमि:
- जनविश्वास (प्रावधानों में संशोधन) अधिनियम,2023 विभिन्न अधिनियमों में छोटे अपराधों को व्यवस्थित रूप से अपराधमुक्त करने वाला पहला समेकित कानून है। इसे 11 अगस्त 2023 में अनुसूचित किया गया तथा इसके माध्यम से 19 मंत्रालयों/ विभागों की ओर से प्रशासित 42 केंद्रीय अधिनियमों के 183 प्रावधानों को अपराधमुक्त कर दिया गया था
- जन विकास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक, 2025 इस सुधार एजेंडे का विस्तार करते हुए 10 मंत्रालयों/ विभागों कीओर से प्रशासित 16 केंद्रीय अधिनियमों को इसमें शामिल करता है।
- चायअधिनियम, 1953, विधिक माप विज्ञान अधिनियम, 2009, मोटर वाहन अधिनियम, 1988, और औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940, जैसे चार अधिनियम, जन विश्वास अधिनियम, 2023 का हिस्सा थे और वर्तमान विधेयक के अंतर्गत इनका और अधिक गैर-अपराधीकरण करने का प्रस्ताव है।
उद्देश्यः
- कानूनों के अनुपालन को सरल बनाकर, कानूनों को अपडेट करना और विश्वास आधारित व्यवस्था को बढ़ावा देना।
प्रावधान : इस अधिनियम से कुल 355 प्रावधानों के संशोधन का प्रावधान हैं, जिनमें 288 प्रावधानों का ईज ऑफ़ डूइंग बिजनेस को प्रोत्साहन देने के लिए गैर-अपराधीकरण किया जायेगा तथा 67 प्रावधानों में जीवन सुगमता को सुगम बनाने के लिए संशोधन का प्रावधान है।
- कृत्यों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना:- यह 288 प्रावधानों के तहत वर्णिन कृत्यों को अपराध की श्रेणी से बाहर करता है तथा मामूली गलती के लिए जेल की सजा के स्थान पर जुर्माने या चेतावनी का प्रावधान करता है।
- दंड अपराध के अनुपात में होगा तथा बार-बार अपराध करने पर दंड में क्रमिक वृद्धि की जाएगी।
- पहली बार उल्लंघन पर : 10 अधिनियमों के अंतर्गत उल्लिखित 76 अपराधों के मामले में पहली बार अपराध करने पर परामर्श या चेतावनी दी जाएगी।
- ईज ऑफ़ लिविंग सुधारः इसके लिए नई दिल्ली नगरपालिका परिषद् अधिनियम-1994 और मोटर वाहन अधिनियम-1988 में संशोधन हेतु विविध प्रावधान प्रस्तावित किए गए है।
- न्यायनिर्णयनतंत्र: नामित अधिकारियों को प्रशासनिक प्रक्रियाओं के माध्यम से दंड आरोपित करने का अधिकार दिया गया है, जिससे न्यायपालिका पर बोझ कम हो जाएगा।
- प्रत्येक 3 साल में दण्ड एवं जुर्माना 10% बढ़ जाएगें ताकि नया कानून बनाने की जरूरत न पड़े।