BLUE ECONOMY नीली अर्थव्यवस्था


Aaditya Deore

नीली अर्थव्यवस्था (BLUE ECONOMY)


नीली अर्थव्यवस्था या ‘ब्लू इकोनॉमी’ का तात्पर्य आर्थिक विकास,  आजीविका और परिवहन के लिये समुद्री संसाधनों का सदुपयोग  तथा समुद्री पारिस्थितिक तंत्र के संरक्षण से है।

भारत के संदर्भ में नीली अर्थव्यवस्था में नौवहन, तटीय एवं समुद्री पर्यटन, मत्स्य पालन और समुद्र में तेल एवं गैस का उत्पादन आदि सम्मिलित है ।

 

नीली अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की आवश्यकता

  1. भारत की लगभग 7500 किलोमीटर लंबी तटरेखा है तथा समुद्री अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक बंदरगाह एवं शिपयार्ड भी उपलब्ध है ।
  2. वर्ष 2030 वैश्विक स्तर पर महासागरीय अर्थव्यवस्था का आकार 3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है ।
  • नीली अर्थव्यवस्था के तहत भारत में मछलीपालन को और अधिक मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है ।
  • वर्तमान में भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है, जो वैश्विक उत्पादन में करीब8% का योगदान देता है।

 

मत्स्यपालन को बढ़ावा देने के लिए किए गए प्रयास :

  • केंद्रीय बजट 2025-26 में मत्स्य पालन के लिए 2700 करोड़ से अधिक के प्रावधान किए गए है ।
  • प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना:
  • यह योजना मछली उत्पादन और उत्पादकता में सुधार, गुणवत्ता मानकों को बेहतर बनाने, आधुनिक तकनीक लाने, कटाई के बाद के बुनियादी ढाँचे को मज़बूत करने और बेहतर प्रबंधन के लिए काम करती है।
  • 22 जुलाई2025 तक, मत्स्य विभाग ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 21,274.16 करोड़ रुपए मूल्य की मत्स्य विकास परियोजनाओं को मंज़ूरी दी है।

 इसके अंतर्गत तीन स्मार्ट और एकीकृत मत्स्य पालन बंदरगाहों को मंजूरी दी गई है:

  1. दीव में वनकबारा
  2. पुडुचेरी में कराईकल
  3. गुजरात में जखाऊ

प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह योजना :

  • यह योजना प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई)के तहत एक केंद्रीय क्षेत्र की उप-योजना है।
  • अवधि : 2023-24 से2026-27 तक चार वर्षों की अवधि के लिए
  • अनुमानित वितीय निवेश : 6000 करोड
  • यह योजना औपचारिकीकरण, बीमा कवरेज, वित्तीय मदद तक पहुंच और मूल्य श्रृंखला में गुणवत्ता आश्वासन को बढ़ावा देकर मत्स्य पालन व्यवस्था में दीर्घकालिक बदलाव लाने में मदद करती है।
  • राष्ट्रीय मत्स्य पालन डिजिटल प्लेटफार्म :
  • यह डिजिटल प्लेटफॉर्मप्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (पीएम-एमकेएसएसवाई) के तहत विकसित किया गया है।
  • इसका उद्देश्य सभी हितधारकों के लिए काम-आधारित डिजिटल पहचान बनाकर मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्र को औपचारिक रूप देना है।
  • अगस्त2025 तकमछुआरोंसूक्ष्म उद्यमोंमछली किसान उत्पादक संगठनों और निजी कंपनियों सहित कुल 26 लाख से अधिक हितधारकों ने पोर्टल पर पंजीकरण कराया है।

मत्स्य पालन एवं जलीय कृषि अवसंरचना विकास निधि :

  • इसका गठन समुद्री और अंतर्देशीय मत्स्य पालन में मूलभूत ढ़ांचे को मज़बूत करने के लिए किया गया.
  • इस निधि के कार्यान्वयन के लिए राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करता है
  • किसान क्रेडिट कार्ड योजना का लाभ मत्स्य पालन के लिए भी शुरू किया गया है ।
  • धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के साथ संरेखित किया गया है तथा आदिवासी सामुदायिक समूहों तथा व्यक्तियों को मत्स्य पालन हेतु सहायता प्रदान की जा रही है

अंतर्राष्ट्रीय सहयोग :

  • मार्च2025 में, मत्स्य पालन विभाग ने भारत में ब्लू पोर्ट्स को मज़बूत करने के लिए FAO (Food and Agriculture Organization of the United Nations) के साथ एक तकनीकी सहयोग कार्यक्रम पर हस्ताक्षर किए।
  • मई2025 में, इको-फिशिंग पोर्ट्स की अवधारणा को बढ़ावा देने के लिए फ्रांसीसी विकास बैंक (AFD) के साथ एक संयुक्त कार्यशाला आयोजित की गई।

 

FOLLOW US