चुनाव अधिकारियों पर भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) का नियंत्रण


चुनाव अधिकारियों पर भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) का नियंत्रण


पृष्ठभूमि :

  • हाल ही में भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) और पश्चिम बंगाल सरकार के मध्य चुनाव ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों के अनुशासनात्मक नियंत्रण को लेकर एक विवाद हुआ।
  • इस घटना ने एक चिर-परिचित प्रश्न को पुनः उभारा है: क्या चुनाव अधिकारी भारतीय निर्वाचन आयोग के अधीन होते हैं या राज्य सरकार के?

 

संवैधानिक एवं कानूनी परिप्रेक्ष्य :

  • भारतीय संविधान के निर्माताओं, विशेषकर डॉ. अम्बेडकर, की यह मंशा थी कि निर्वाचन आयोग एक स्वतंत्र निकाय हो और चुनावों के दौरान अधिकारियों पर उसका पूर्ण अधिकार हो।
  • इस मंशा को कानूनी बल प्रदान करने के लिए, वर्ष 1988 में संसद ने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 में संशोधन किए। इन संशोधनों के माध्यम से चुनाव ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों को औपचारिक रूप से आयोग के नियंत्रण में लाया गया।
  • संशोधित 1950 अधिनियम की धारा 13CC: इस धारा के अनुसार, मुख्य निर्वाचन अधिकारी, जिला निर्वाचन अधिकारी, निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी और मतदाता सूचियों से संबंधित अन्य अधिकारी “भारतीय निर्वाचन आयोग के प्रतिनियुक्ति पर माने जाएँगे” और इस अवधि में वे आयोग के “नियंत्रण, अधीक्षण एवं अनुशासन” के अधीन होंगे।
  • संशोधित 1951 अधिनियम की धारा 28A: यह धारा इसी सिद्धांत को रिटर्निंग अधिकारियों, पीठासीन अधिकारियों, मतदान अधिकारियों और यहाँ तक कि चुनाव ड्यूटी के लिए नामित पुलिसकर्मियों पर भी लागू करती है। यह नियंत्रण चुनाव की अधिसूचना से लेकर परिणाम की घोषणा तक की अवधि के लिए प्रभावी होता है।
  • टी.एन. शेषन का कार्यकाल: मुख्य निर्वाचन आयुक्त के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, टी.एन. शेषन का इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से टकराव हुआ था। वर्ष 1993 में, सरकार द्वारा केंद्रीय बलों की तैनाती से इनकार करने पर उन्होंने 31 चुनाव स्थगित कर दिए थे। बाद में, सर्वोच्च न्यायालय ने चुनाव ड्यूटी पर अधिकारियों पर ECI के अधिकार को सही ठहराया।
  • 2000 का समझौता: सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए एक ऐतिहासिक निर्णय (समझौते) में, भारतीय निर्वाचन आयोग की अनुशासनात्मक शक्तियों को विस्तार से लिपिबद्ध किया गया।
  • ECI कर्तव्य में लापरवाही के लिए अधिकारियों को निलंबित कर सकता है, उन्हें प्रतिस्थापित कर सकता है और उनकी मूल कैडर में एक आचार रिपोर्ट के साथ वापस भेज सकता है।
  • ECI सक्षम प्राधिकारी को अनुशासनात्मक कार्यवाही की अनुशंसा कर सकता है, जो इस पर छह महीने के भीतर कार्यवाही करने और ECI को सूचित करने के लिए बाध्य होगा।
  • केंद्र ने राज्यों को भी इसी ढाँचे का पालन करने की सलाह देने पर सहमति व्यक्त की।

 

वर्तमान स्थिति :

  • वर्तमान विवाद: पश्चिम बंगाल सरकार ने मतदाता सूची में हेरफेर के आरोपी चार अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही करने से इनकार कर दिया है। उनका तर्क है कि अभी तक किसी चुनाव की घोषणा नहीं हुई है और इसलिए आदर्श आचार संहिता लागू नहीं होती।
  • ECI के संभावित कदम:
  • आयोग राज्य के मुख्य सचिव को तलब कर सकता है।
  • ECI केंद्र सरकार से 2000 के समझौते की बाध्यकारी प्रकृति को राज्य पर लागू करने का आग्रह कर सकता है।
  • आयोग जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और 1951 के तहत अपनी शक्तियों का हवाला देते हुए न्यायालय का रुख कर सकता है।

 

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