केरल के कोझिकोड ज़िले में एक घातक मस्तिष्क-भक्षी अमीबा ने एक नौ वर्षीय बच्चे की जान ले ली है और दो अन्य को संक्रमित किया है।
भारत में इसका पहला मामला 1971 में दर्ज किया गया था।
केरल में पहला मामला 2016 में सामने आया था।
1965 से विश्व स्तर पर PAM (प्राइमरी अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस) के 500 से कम मामले सामने आए हैं। अंटार्कटिका को छोड़कर यह प्रत्येक महाद्वीप में सूचित किया गया है।
रोगजनक :
नाम: नाइगलेरिया फाउलेरी (Naegleria fowleri)।
यह एक एकल-कोशिकीय जीव है जो विश्व भर में गर्म, ताजे जल और मृदा में पाया जाता है और 46°C तक के उच्च तापमान में पनपता है।
यह अमीबा झीलों, नदियों, तरणतालों, स्प्लैश पैड्स, सर्फ पार्कों या अन्य मनोरंजक स्थलों में पाया जाता है, जहाँ का रख-रखाव खराब होता है अथवा क्लोरीनीकरण न्यूनतम होता है।
नाइगलेरिया फाउलेरी सामान्यतः लोगों के तैराकी करते समय नाक के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है।
यह मस्तिष्क तक पहुँचता है, जहाँ यह मस्तिष्क के ऊतकों को नष्ट करता है और सूजन उत्पन्न करता है।
अमीबा से दूषित जल के सेवन से नाइगलेरिया फाउलेरी का संक्रमण नहीं होता है।
संक्रमण :
नाम: प्राइमरी अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस (PAM)।
PAM एक गैर-संक्रामक रोग है।
लक्षण :
प्रारंभिक अवस्था में सिरदर्द, बुखार, मिचली और उल्टी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
रोगी को बाद में गर्दन में अकड़न, भ्रम, दौरे, मतिभ्रम का अनुभव हो सकता है और वह कोमा में भी जा सकता है।
यूएस सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के अनुसार, अधिकांश रोगी लक्षणों के प्रारंभ होने के 1 से 18 दिनों के भीतर मर जाते हैं।
विश्व स्तर पर मृत्यु दर 97% सूचित की गई है।
उपचार :
वैज्ञानिकों द्वारा अभी तक इस रोग के लिए कोई प्रभावी उपचार नहीं खोजा गया है।
पीएएम का उपचार सामान्यतः एम्फोटेरिसिन बी, फ्लुकोनाजोल, एज़िथ्रोमाइसिन, रिफाम्पिसिन, मिल्टेफोसिन और डेक्सामेथासोन दवाओं के संयोजन से किया जाता है।