ई-वेस्ट प्रबंधन
- इलेक्ट्रॉनिक अपशिष्ट (ई-अपशिष्ट) से तात्पर्य ऐसे विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से है जो पुराने हो गए हैं या जो कार्यशील नहीं हैं जैसे मोबाइल फ़ोन, कंप्यूटर,यूपीएस आदि ।
- ई-अपशिष्ट में अनेक विषैले रसायन होते हैं जिनमें सीसा, कैडमियम, पारा तथा निकल जैसी धातुएँ शामिल है ।
- पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अनुसार ई-कचरा प्रबंधन नियम 2022 के अंतर्गत 106 इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को विनियमित किया जा रहा है ।
- अपशिष्ट बैटरीज के प्रबंधन के लिए बैटरी अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2022 अधिसूचित किया गया है, जो की सभी प्रकार की बैटरी अर्थात इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी, पोर्टेबल बैटरी, ऑटोमोटिव बैटरी और औद्योगिक बैटरी को कवर करता है।
- इन नियमों के अंतर्गत, उत्पादकों (आयतकों सहित) को अपशिष्ट बैटरियों के संग्रह और पुनर्चक्रण या नवीनीकरण के लिए अनिवार्य विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) लक्ष्य दिए गये है।
- केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर वार्षिक रूप से ई-कचरा उत्पादन का अनुमान लगाया जाता है।
- इसके अनुसार वर्ष 2024-2025 में लगभग 97 लाख टन ई-कचरा उत्पादित हुआ है ।
केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने ई-अपशिष्ट नियमों के प्रभावी प्रबंधन के लिए निम्नलिखित कदम उठाए हैं-
- एक ऑनलाइन ई-अपशिष्ट ईपीआर पोर्टल विकसित किया गया है, जिसमें ई-कचरे के उत्पादकों, निर्माताओं, पुनर्चक्रणकर्ताओं और रिफर्बिशर्स जैसी संस्थाओं को पंजीकरण करवाना अनिवार्य है।
- सीपीसीबी द्वारा ई-अपशिष्ट के वैज्ञानिक और पर्यावरणीय दृष्टि से अनुकूल प्रबंधन के लिए दिशा-निर्देश तैयार किए गए है ।
- पंजीकृत संस्थाओं को ई-अपशिष्ट पोर्टल पर त्रैमासिक और वार्षिक रिटर्न के माध्यम से अपना अनुपालन प्रस्तुत करना अनिवार्य है ।
- नियमों में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड या किसी नामित एजेंसी द्वारा सत्यापन और ऑडिट का प्रावधान किया गया है ताकि इन नियमों के अनुपालन की पुष्टि आवश्यकतानुसार, यादृच्छिक निरीक्षण और आवधिक ऑडिट के माध्यम से की जा सके तथा इन नियमों के उल्लंघन के विरुद्ध कार्यवाही की जा सके।
SOURCE – PIB WEBSITE