भारत का मेट्रो नेटवर्क 248 किलोमीटर (2014) से बढ़कर 23 शहरों में 1013 किलोमीटर (2025) हो गया है। इसमें 5 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया गया है और मेक इन इंडिया के तहत 2000 से ज़्यादा कोचों का घरेलू स्तर पर निर्माण किया गया है। इस वृद्धि ने भारत को विश्व का तीसरा सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क बना दिया है। नई मेट्रो लाइनों के चालू होने की गति नौ गुना तेज हो गई है ।
प्रमुख नीतियाँ –
मेट्रो रेल नीति 2017 :
यह नीति शहरों के लिए व्यापक गतिशीलता योजना (CMPs) तैयार करना और शहरी महानगरीय परिवहन प्राधिकरण (UMTAs) स्थापित करना अनिवार्य करती है।
केंद्रीय वित्त पोषण के लिए पात्र होने के लिए, परियोजनाओं में न्यूनतम 14% की आर्थिक आंतरिक प्रतिफल दर (EIRR) होनी चाहिए और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के माध्यम से निजी क्षेत्र की भागीदारी अनिवार्य होनी चाहिए।
मेक इन इंडिया: इस पहल में यह अनिवार्य किया गया है कि कम से कम 75% मेट्रो कोच और 25% प्रमुख उपकरण घरेलू स्तर पर खरीदे जाएँ।
हरित एवं तकनीकी नवाचार:
सौर ऊर्जा संचालित स्टेशन, पुनर्योजी ब्रेकिंग, चालक रहित रेलगाड़ियाँ, i-ATS (स्वदेशी स्वचालित ट्रेन पर्यवेक्षण प्रणाली), क्यूआर आधारित टिकटिंग, ETCS (यूरोपीय ट्रेन नियंत्रण प्रणाली) सिग्नलिंग।
उल्लेखनीय परियोजनाएँ:-
पहली अंडरवाटर मेट्रो (कोलकाता)
वाटर मेट्रो (कोच्चि)
नमो भारत हाई-स्पीड ट्रेन
भविष्य की योजनाएँ:-
दिल्ली, पुणे, बैंगलोर, अहमदाबाद में विस्तार और 24 शहरों में वाटर मेट्रो सेवाएँ।
महत्व:
शहरी गतिशीलता को बढावा, भीड़भाड़ का संतुलन, स्थिरता प्रदान करना और यह 2030 तक भारत के 3 ट्रिलियन डॉलर के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के लक्ष्य के अनुरूप है।