म्यूजियम ऑफ़ ग्रेस


म्यूजियम ऑफ़ ग्रेस


चर्चा में क्यों: 

केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय द्वारा कृष्णा सर्किट के तहत 23 करोड़ 42 लाख रुपये की लागत से राजस्थान के राजसमंद में म्यूजियम ऑफ़ ग्रेस का निर्माण करवाया गया है ।

 

म्यूजियम की विशेषताएँ :

  • म्यूजियम ऑफ़ ग्रेस में पुष्टिमार्गीय वल्लभ संप्रदाय के इतिहास और माहात्म्य आदि को विस्तृत रूप में भव्य चित्रों के माध्यम से श्रव्य एवं दृश्य रूप में दर्शाया गया है।
  • म्यूजियम ऑफ़ ग्रेस का प्रमुख उद्देश्य पुष्टिमार्ग की विरासत को प्रदर्शित करते हुए आगंतुकों को एक अनुभवात्मक एवं गहन यात्रा पर ले जाना है ।
  • इस म्यूजियम में तैयार किए गए डिजिटल प्रतिष्ठानों के माध्यम से पुष्टिमार्ग की कथा को उसकी स्थापना से लेकर वल्लभ-कुल , सेवा और उत्सवों तक क्रमबद्ध रूप से प्रदर्शित किया गया है ।

 

वल्लभ/ पुष्टिमार्गी/ रूद्र संप्रदाय :

  • पुष्टिमार्ग, मध्यकाल में वैष्णव धर्म के पाँच महान संप्रदायों में से एक के रूप में उभरा जिसकी स्थापना श्री वल्लभाचार्य ने की तथा वर्तमान में बड़ी संख्या में अनुयायी इस परम्परा का पालन करते है ।
  • इस संप्रदाय का दार्शनिक आधार शुद्धाद्वैत दर्शन या शुद्ध अद्वैतवाद है , जो इसे वैष्णव परंपरा में विशिष्ट बनाता है ।
  • इस संप्रदाय में भगवान कृष्ण के बाल स्वरुप की पूजा की जाती है । पुष्टिमार्ग परंपरा कृष्ण को सर्वस्व और सर्वस्व को कृष्ण के रूप में स्वीकार करती है ।
  • इस संप्रदाय के मंदिरों को हवेली कहा जाता है तथा इनमें हवेली संगीत गाया जाता है।
  • मंदिर की दीवारों पर बने भगवान् श्री कृष्ण तथा उनके जीवन से सम्बंधित चित्र, पिछवाई कहलाते है ।

 

राजस्थान में वल्लभ संप्रदाय:

  • राजस्थान में वल्लभ संप्रदाय का व्यापक विस्तार औरंगजेब के शासनकाल में हुआ ।
  • राजस्थान में इस संप्रदाय के 41 मंदिर है ।
  • प्रमुख मंदिर-
  • मथुरेश जी – कोटा
  • श्री नाथजी – सिहाड़ (नाथद्वारा, राजसमन्द)
  • द्वारिकाधीश – कांकरोली (राजसमन्द)
  • गोकुलचन्द्र जी – कामां (डीग)
  • मदनमोहन जी – कामां (डीग)

 

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