GDP, IIP, और CPI के आधार वर्ष में परिवर्तन
GDP, IIP, और CPI के आधार वर्ष में परिवर्तन
चर्चा में क्यों?
- सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के द्वारा सकल घरेलू उत्पाद (GDP) तथा औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) के लिए नया आधार वर्ष 2022-23 और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के लिए नया आधार वर्ष 2024 प्रस्तावित है।
- सकल घरेलू उत्पाद (GDP): यह एक विशिष्ट समयावधि के भीतर किसी देश के घरेलू क्षेत्र में उत्पादित सभी अन्तिम वस्तुओं और सेवाओं का मौद्रिक मूल्य है।
जीडीपी आधार वर्ष संशोधन का इतिहासः
अब तक आधार वर्ष में सांत बार संशोधन किया जा चुका है।
- पिछला संशोधन : 2015 में आधार वर्ष को 2004-05 से बदलकर 2011-12 कर दिया गया था।
- प्रस्तावित 2026 का संशोधन आठवां आधार वर्ष संशोधन होगा ।
- राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी पर एक सलाहकार समिति का गठन: MoSPI दद्वारा GDP के लिये आधार वर्ष में परिवर्तन हेतु बिस्वनाथ गोल्डर (Biswanath Goldar) की अध्यक्षता में समिति गठित की गई थी।
आधार वर्ष: वह संदर्भ वर्ष (Reference year) होता है जिसकी कीमतों को स्थिर कीमतों के रूप में उपयोग कर राष्ट्रीय आय में वास्तविक वृद्धि (मुद्रास्फीति को घटाकर) की गणना की जाती है।
- वास्तविक GDP की गणना के लिए इस्तेमाल होने वाला एक बेंचमार्क है।
आधार वर्ष परिवर्तन के महत्व :
- आंकलन में सटीकता : आर्थिक सुधारों से सम्बन्धित नये डेटा स्त्रोतों और विधियों का प्रयोग होगा जैसे GST से जुड़े डेटा का प्रयोग।
- मुद्रास्फीति के प्रभाव को दूर करना : मुद्रास्फीति के समायोजन के बाद वास्तविक आर्थिक विकास का अधिक सटीक मापन होगा ।
- संरचनात्मक परिवर्तनों का समायोजन : अर्थव्यवस्था में हो रहे संरचनात्मक परिवर्तनों को बेहतर ढंग से प्रदर्शित करेगा। जैसे डिजिटलीकरण, गिग अर्थव्यवस्था।
- बेहतर नीति निर्माण : सटीक GDP डेटा से बेहतर नीतियों का निर्माण होगा।
- वैश्विक विश्वसनीयता में वृद्धिः अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ), विश्व बैंक और रेटिंग एजेंसियां इस डेटा का उपयोग करके भारत की अर्थव्यवस्था का आकलन करती हैं।