गहन समुद्र से जुड़ा मिशन – महासागर तल तक पहुचने के लिए भारत का प्रवेश द्वार


गहन समुद्र से जुड़ा मिशन – महासागर तल तक पहुचने के लिए भारत का प्रवेश द्वार

शुभारंभ: 2021 में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MOES) द्वारा।

परिव्यय: ₹4077 करोड़ (5 वर्षों के लिए)

लक्ष्य: गहन महासागरीय संपदा का सतत रूप से दोहन करना और नीली अर्थव्यवस्था (Blue Economy) को सुदृढ़ करना।

 

हाल की उपलब्धि (अगस्त 2025):

  • भारत का पहला मानवयुक्त गहन-समुद्री गोता (5000 मीटर) एक्वानॉट्स कमांडर जतिंद्र पाल सिंह और श्री राजू रमेश द्वारा।
  • अंडमान सागर से 100 किलोग्राम से अधिक कोबाल्ट-युक्त पॉलीमेटैलिक नोड्यूल्स का संग्रह।

 

मिशन के घटक:

  • गहन-समुद्री खनन और मानवयुक्त पनडुब्बी के लिए प्रौद्योगिकियों का विकास
    • मत्स्य-6000 (MATSYA-6000): 3 व्यक्तियों को ले जाने में सक्षम, 6000 मीटर की गहराई तक, 12 घंटे की परिचालन अवधि (आपातकालीन परिस्थितियों में 96 घंटे)।
    • उन्नत सेंसर, मैनिपुलेटर आर्म्स, ड्रॉप-वेट एस्केप और ध्वनिक संचार से सुसज्जित।
  • महासागरीय जलवायु परिवर्तन सलाहकार सेवाओं का विकास
    • जलवायु और तटीय पर्यटन के लिए मौसमी-दशकीय पूर्वानुमान।
  • गहन-समुद्री जैव-विविधता के अन्वेषण और संरक्षण हेतु तकनीकी नवाचार
    • समुद्री फार्मा और जैव-प्रौद्योगिकी के लिए गहन-समुद्री वनस्पतियों, जीवों और सूक्ष्मजीवों की खोज।
  • महासागर से ऊर्जा और मीठा जल
    • ओशन थर्मल एनर्जी कन्वर्जन (OTEC) द्वारा संचालित विलवणीकरण (desalination) के लिए अध्ययन।
  • गहरे समुद्र का सर्वेक्षण और अन्वेषण
    • हिंद महासागर में बहु-धातु हाइड्रोथर्मल सल्फाइड स्थलों की पहचान।
  • महासागरीय जीव विज्ञान के लिए उन्नत समुद्री स्टेशन
    • समुद्री जैव-प्रौद्योगिकी हेतु एक शोध-उद्योग इनक्यूबेटर।

 

तकनीकी उपलब्धियाँ:

  • इलेक्ट्रॉन बीम वेल्डिंग (इसरो द्वारा) के माध्यम से निर्मित टाइटेनियम-मिश्र धातु का गोलाकार खोल (26 मीटर व्यास, 80 मिमी मोटा)।
  • 700 परीक्षणों को सफलतापूर्वक किया गया, टाइम-ऑफ-फ्लाइट डिफ्रैक्शन (Time-of-Flight Diffraction) और फेज़्ड एरे अल्ट्रासोनिक टेस्टिंग (Phased Array Ultrasonic Testing) के साथ परीक्षण किया गया।
  • IFREMER (फ्रांसीसी समुद्री अनुसंधान संस्थान) के साथ संयुक्त भारत-फ्रांस अभियान (अगस्त 2025)।

 

 

रणनीतिक महत्व:

  • भारत को मानवयुक्त गहन-समुद्री प्रौद्योगिकी वाले चुनिंदा देशों में से एक के रूप में स्थापित करता है।
  • खनिज सुरक्षा को बढ़ावा देता है (कोबाल्ट, निकल, तांबा, दुर्लभ धातु)।
  • नीली अर्थव्यवस्था के क्षेत्रों को सुदृढ़ करता है: जहाजरानी, मत्स्य पालन, जैव-प्रौद्योगिकी, अपतटीय ऊर्जा।
  • “समुद्र मंथन” की परिकल्पना का समर्थन करता है: एक सुदृढ़ और संसाधन-समृद्ध भारत।

 

 

संभावित प्रश्न (MCQ):

प्रश्न 1. गहन महासागर मिशन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

(1) मत्स्य-6000 को 3 व्यक्तियों को 6000 मीटर की गहराई तक ले जाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

(2) भारत ने अपने पहले 5000 मीटर के गोते के लिए IFREMER (फ्रांस) के साथ सहयोग किया।

(3) मिशन में ओशन थर्मल एनर्जी कन्वर्जन (OTEC) एक घटक के रूप में शामिल है।

उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

  1. A) 1 और 2
  2. B) 2 और 3
  3. C) 1 और 3
  4. D) 1, 2 और 3

 

उत्तर – D

 

प्रश्न: गहन समुद्र से जुड़ा मिशन को अक्सर ‘भारत का समुद्र मंथन’ कहा जाता है। भारत की नीली अर्थव्यवस्था और रणनीतिक स्वायत्तता के लिए इसके महत्व पर चर्चा करें। (250 शब्द)

 

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